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ऐसे जाने आपकी कुंडली में काल सर्प दोष है कि नहीं

कभी-कभी ऐसा होता है कि हमारे जीवन में इतनी उथल-पुथल और इतनी आर्थिक से लेकर शारीरिक, मानसिक परेशानी होती है कि हम समझ नहीं पाते है कि यह कौन सी समस्या है। इसे या तो हम अपनी किस्मत मान लेते है या फिर भगवान को कोसते रहते है कि भगवान की वजह से यह सब हो रहा है लेकिन आप जानते है कि आपकी कुंडली में कोई समस्या हो सकती है जिसके कारण इतनी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। इसके बाद किसी ज्योतिष की शरण में जाते है कि आखिर समस्या क्या है। अगर आपकी जन्म कुंडली में कालसर्प दोष होता है। कालसर्प दोष सुनकर आपको डरने की जरुरत नहीं है। इसके बारें में अगर थोड़ी सी भी ज्योतिष जानकारी दे दे तो आपको इस कालसर्प योग से निवारण मिल सकता है। या फिर आप खुद कुछ उपाय अपनाकर इससे निजात पा सकते है। जानिए क्या है कालसर्प योग और इसे कैसे पहचाने कि आपके कुंडली में कौन सा कालसर्प दोष है। क्या है काल सर्प योग- जब राहु एवं केतु सदा वक्री (उल्टी चाल) रहते हैं। किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली में जब सभी ग्रह राहु एवं केतु के बीच आ जाते हैं तो व्यक्ति कालसर्प योग से पीडित हो जाता है। काल सर्प दोष हर राशि के जातकों के लिए समान नहीं पडती है। यह राशि के अनुसार अलग-अलग प्रभाव दिखाती है। काल सर्प योग एक तरह के नही राशियों की तरह ही 12 प्रकार के होते है। जिनके अलग-अलग प्रभाव और विशेण उपाय होते है। जिनको अपनाकर आप इन कालसर्प दोश से निजात पा सकते है। 1अनन्त कालसर्प दोष जब कुंडली में राहु लग्न में और केतु सप्तम में हो और उस बीच सारे ग्रह हों तो अनन्त नामक कालसर्प योग बनता है। ऐसे जातकों के व्यक्तित्व निर्माण में कठिन परिश्रम की जरूरत पड़ती है।

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हिंदू धर्म में शादी को बहुत पवित्र संस्कार माना जाता है। इसलिए विवाह से पहले कुंडली मिलान की प्रथ…

हिंदू धर्म में शादी को बहुत पवित्र संस्कार माना जाता है। इसलिए विवाह से पहले कुंडली मिलान की प्रथा है। इस दौरान लड़के-लड़की के ग्रहों के साथ उनके गोत्र का भी विशेष महत्व होता है। ब्राम्हण एवं अन्य हिंदू समुदायों में एक ही गोत्र में शादी करना अनुचित माना जाता है। विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से अपशगुन होता है। तो किन कारणों से एक ही गोत्र में नहीं की जाती है शादी, आइए जानते हैं।.हिंदुओं में गोत्र का विशेष महत्व है। वेदों के अनुसार मनुष्य जाति विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप और अगस्त्य जैस महान ऋषियों की वशंज हैं। 2.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक ऋषि की अपनी प्रतिष्ठा है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति एक ही गोत्र में शादी करते हैं तो वह एक ही परिवार के माने जाते हैं।शास्त्रों के अनुसार एक ही वंश में जन्मे लोगों का विवाह हिंदू धर्म में पाप माना जाता है। ऋषियों के अनुसार ये गौत्र परंपरा का उल्लंघन माना जाता है। 4.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक गोत्र में शादी करने से विवाह दोष लगता है। इससे पति-पत्नी के सबंधों में दरार पड़ने का खतरा रहता है। 5.कई विद्वानों के अनुसार एक ही गोत्र में शादी करने से होने वाली संतान को भी कष्ट झेलने पड़ते हैं। इससे संतान में कई अवगुण और रोग उत्पन्न हो सकते हैं। 6.गोत्र परंपरा का नाता रक्त संबंधों से होता है। ऐसे में एक ही कुल में शादी करने से न सिर्फ होने वाली संतान में शारीरिक दोष बल्कि चरित्र और मानसिक दोष भी हो सकते हैं। 7.एक ही गोत्र में कई अलग-अलग कुल होते हैं। इसलिए अलग-अलग समुदायों की अपनी परंपराएं हैं। कहीं 4 गोत्र टाले जाते हैं तो किसी वंश में 3 गोत्र टालने का भी नियम है। इससे विवाह में किसी तरह का दोष नहीं लगता हैआचा

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